"इंतिज़ार"
जान तो गया हूँ मैं कुछ नहीं तिरे मन में
जान तो गया है तू बस तू है मिरे मन में
क्या ये मेरी ग़लती है पहली मर्तबास ही
इश्क़ हो गया मुझ को अपने आश्ना से ही
क्या करूँ बता मुझ को तेरा ही दिवाना हूँ
तू नए का शाइक़ है और मैं पुराना हूँ
रोज़-ओ-शब नए लोगों से मिला करेगा तू
मेरा दिल जलाने को और क्या करेगा तू
चाहने का वा'दा है वादें को निभाऊँगा
दिल की राख से तेरी राह को सजाऊँगा
ख़ूब ख़ुश रहेगा तू फिर जहाँ-कहीं होगा
इतना जानता हूँ मैं तू मिरा नहीं होगा
फिर भी उम्र भर तेरा इंतिज़ार करना है
तुझ से प्यार करता हूँ तुझ से प्यार करना है
— Bhuwan Singh















