"इक शख़्स"
थोड़ा बेचैन है और आँखों में भी पानी है
देखो इस शख़्स को भी कोई परेशानी है
जो पसंद आता था अब उस से ही डर जाता है
जानते हो ये किसी नाम से घबराता है
इक इसी नाम ने बर्बाद किया था उस को
आज बस इस लिए ही याद किया था उस को
नींद फिर कैसे लगे जाए भी क्यूँ सोने वो
याद जो कर लिया तो लग गया है रोने वो
रात भर रोएगा अब सुर्ख़ पड़े नैन से वो
माँ तो समझेगी कि सोया है बड़े चैन से वो
माँ की ख़ातिर ही तो मुॅंह छुप गया था चादर से
जाने पर किस लिए अब उठ गया है बिस्तर से
या'नी अब ऐसा कोई काम करेगा लड़का
अपने घर वालों को बदनाम करेगा लड़का
काम जो करना है उस काम से घबराया है
शाम को इस लिए मय-ख़ाने से हो आया है
ज़िक्र कर आया था इस काम का मय-ख़ाने में
कोई शय खोज रहा इस लिए तह-ख़ाने में
किसी आवाज़ बिना होगा तमाशा ऐसा
शोर करता नहीं हथियार तलाशा ऐसा
ख़ुश तो है हाथ में रस्सी लिए मन अब उस का
काँपने लग गया है पर ये बदन अब उस का
मुस्कुरा कर मगर कहता है कि सुन बात मिरी
अलविदा हँस के ही कर आख़िरी है रात मिरी
या'नी अब ज़िंदगी का आख़िरी दम आ गया है
आगे बस मौत ही है ऐसा क़दम आ गया है
कँपकँपाते लबों से नाम वही जाप रहा
आँखें छत देख रही हाथ गला नाप रहा
नाम अब उस के गले में ही अटक जाएगा
देखते देखते वो छत से लटक जाएगा
क्यूँ भला इतना है अफ़सुर्दा वो भी मेरी तरह
होना क्यूँ चाहता है मुर्दा वो भी मेरी तरह
मुझ सा क्यूँ दिख रहा है मुझ को हर इक मायने में
मुझ को ये शख़्स ही क्यूँ दिख रहा है आइने में















