मेरी उदासी से निकल इक लड़की अपने घर गई
मैं जिस को इतना चाहता था वो बहन अब मर गई
मेरी मोहब्बत सब हदों को पार कर पहुँची वहाँ
लेकिन उसे छूते ही जाने क्यूँ वो लड़की डर गई
पहले तो इतना चाहता था उस बहन को तू मगर
है पूछता क्यूँ अब नहीं ऐसा तो क्या वो कर गई
तेरा मुहब्बत में तो ब्रज नुक़सान फिर भी कम हुआ
तू देख मुझ को ज़िंदगी मेरी दुखों से भर गई
— Brajnabh Pandey















