हर मंज़र बहता पानी है
पर यादें ठहरा पानी है
जब अपनों ने देखा रोते
तब मैं ने बोला पानी है
सब रंगों में ख़ुद को घोले
बन जा तू जैसा पानी है
— Chandan Mishra
पर यादें ठहरा पानी है
जब अपनों ने देखा रोते
तब मैं ने बोला पानी है
सब रंगों में ख़ुद को घोले
बन जा तू जैसा पानी है
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