आशिक़ी की ज़रूरत नहीं है
अब किसी की ज़रूरत नहीं है
ख़ुद मेरी जाँ ने की बे-वफ़ाई
अजनबी की ज़रूरत नहीं है
दिल को मैं ने बनाया है पत्थर
दिल-लगी की ज़रूरत नहीं है
जो है दिल में वही है ज़बाँ पर
मुख़बिरी की ज़रूरत नहीं है
ख़ुश रहे बे-वफ़ा वो दग़ा-बाज़
दुश्मनी की ज़रूरत नहीं है
ज़ीस्त गुज़रे फ़क़त ग़म ही ग़म में
यूँ ख़ुशी की ज़रूरत नहीं है
मौत से है मेरा दोस्ताना
ज़िंदगी की ज़रूरत नहीं है
इश्क़ के दर्द गाने की ख़ातिर
मयकशी की ज़रूरत नहीं है
मशवरा दे रहा है वो 'दानिश'
ख़ुद-कुशी की ज़रूरत नहीं है
— Danish Balliavi















