कैसी ज़िंदगानी है कैसी ये जवानी है
प्यार करना ग़ैरों से मौत की निशानी है
दिल में पहले बसता है फिर से क्यूँ निकलता है
पूछना है तुझ से जाँ ऐसी क्यूँ रवानी है
जाने कितनी मुद्दत से देखता नहीं मुझको
कल जो तू ने देखा था तेरी मेहरबानी है
कुछ तो मेरे दुश्मन की तुझ पे हैं बुरी नज़रें
कुछ न होने दूँगा मैं तू तो मेरी रानी है
तू जो कहता है मुझ से प्यार तुझ से है ''दानिश''
तू निभा न पाएगा कहना बस ज़बानी है
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Danish Balliavi
our suggestion based on Danish Balliavi
As you were reading Dushman Shayari Shayari