नतीजा प्यार का यारों कहीं उल्टा न हो जाए
जिसे तुम चाहते हो वो कहीं सबका न हो जाए
तुम्हें लगता है उल्फ़त ज़िंदगी भर वो निभाएगा
उसे रंगीन समझे हो कहीं सादा न हो जाए
ख़ुशी तो बस मिलेगी सिफ़्र फ़ीसद प्यार में तुमको
मैं जो जो कह रहा हूँ हू-ब-हू वैसा न हो जाए
तुम आँसू मत बहाओ हर किसी के सामने वरना
मुहल्ले में कहीं रुस्वाई की चर्चा न हो जाए
तेरे सर पर मुहब्बत का नशा है सोच ले 'दानिश'
जो दिल का दर्द कम है वो कहीं ज़्यादा न हो जाए
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