उसे पाने की हसरत हम नहीं करते नहीं करते
कभी भी ऐसी हरकत हम नहीं करते नहीं करते
हमारा बे-वफ़ा वो शख़्स जिस महफ़िल में जाता है
उसी महफ़िल में शिरकत हम नहीं करते नहीं करते
जो हम इक़रार करते हैं उसे हरगिज़ निभाते हैं
मुहब्बत में सियासत हम नहीं करते नहीं करते
दिलों को तोड़ने में सिर्फ़ यूँँ रहती हैं अव्वल पर
हसीनों से मुहब्बत हम नहीं करते नहीं करते
हमारे ख़ून में पलती है 'दानिश' बस वफ़ादारी
दग़ाबाज़ों की इज़्ज़त हम नहीं करते नहीं करते
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Danish Balliavi
our suggestion based on Danish Balliavi
As you were reading Haya Shayari Shayari