मोहब्बत का ज़माना चल रहा है
वफ़ा लेकिन अभी तक ग़ुमशुदा है
सुना है दोस्त मेरा ख़ुश बहुत है
सुना है इश्क़ में बिल्कुल नया है
किसी से दिल लगाए नइ लगाए
मोहब्बत एक ज़ाती मसअला है
कहाँ मानेंगे दीवाने किसी की
कहाँ इनपर किसी का बस चला है
नई पीढ़ी का फ़ैशन है सो हम को
सभी को 'ब्रो' बुलाना पड़ रहा है
— Divy Kamaldhwaj















