इतना भी क्या दिल दुखाना चाहिए
शिकवों को अब तो भुलाना चाहिए
तुम अकेले जीत लोगे ये जहाँ
इस गुमाँ को अब गिराना चाहिए
नुक़्स तब सारे नज़र आ जाते हैं
जाने को जब इक बहाना चाहिए
ढूँढ़ते हैं सब मोहब्बत हर तरफ़
रोने को जब एक शाना चाहिए
ख़ामुशी वाले ज़माने अब गए
इश्क़ जब हो तो बताना चाहिए
जिस ने अपनों को भी पहचाना नहीं
कहता है रिश्ता निभाना चाहिए
दुश्मनों को मात देनी है अगर
दोस्त तुम को मुस्कुराना चाहिए
— Jay kishan















