
एक ख़त्म नहीं होता कि रग-ए-जां दबाने को
कोई नया मसअला तैयार रहता है
जाने तू कैसी अदालत का मुंसिफ़ है
तेरी निगाह में हर शख़्स गुनहगार रहता है
— Sushrut Tiwari
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