ऐ कि तू ग़फ़्लत में है डूबा हुआ

काम करना सीख तुझ को क्या हुआ
आदमी डट कर अगर मेहनत करे
फिर कमा ले अपना ज़र खोया हुआ
ग़ौर से दोबारा पढ़ लेने के बा'द
याद हो जाए सबक़ भूला हुआ
और कमज़ोरी में वर्ज़िश के तुफ़ैल
ख़ूब मोटा हो बदन सूखा हुआ
लेकिन इस दुनिया में ऐसा कौन है
वक़्त वापस लाए जो गुज़रा हुआ
जिस ने अपने फ़र्ज़ की परवा न की
एक दिन पछताएगा रोता हुआ
'फ़ैज़' मंज़िल पर पहुँच सकता नहीं
कोई सीधी राह से भटका हुआ

— Faiz Ludhianvi

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