क्या से क्या हो सकता हूँ मैं
आईना हो सकता हूँ मैं
इश्क़ मुहब्बत करता हूँ तो
दीवाना हो सकता हूँ मैं
फूटी कौड़ी कह सकते हो
सरमाया हो सकता हूँ मैं
वैसे बारिश का पानी हूँ
मटमैला हो सकता हूँ मैं
कितने चेहरे याद हैं मुझ को
बुत-ख़ाना हो सकता हूँ मैं
खाली-खाली सा लगता हूँ
वीराना हो सकता हूँ मैं
मुझ को अपनी फ़िक्र नहीं है
ला-परवा हो सकता हूँ मैं
— gabruu govind















