aks ki soorat dikha kar aap ka saani mujhe | अक्स की सूरत दिखा कर आप का सानी मुझे

  - Ghulam Mohammad Qasir

अक्स की सूरत दिखा कर आप का सानी मुझे
साथ अपने ले गया बहता हुआ पानी मुझे

मैं बदन को दर्द के मल्बूस पहनाता रहा
रूह तक फैली हुई मिलती है उर्यानी मुझे

इस तरह क़हत-ए-हवा की ज़द में है मेरा वजूद
आँधियाँ पहचान लेती हैं ब-आसानी मुझे

बढ़ गया इस रुत में शायद निकहतों का ए'तिबार
दिन के आँगन में लुभाए रात की रानी मुझे

मुंजमिद सज्दों की यख़-बस्ता मुनाजातों की ख़ैर
आग के नज़दीक ले आई है पेशानी मुझे

  - Ghulam Mohammad Qasir

Paani Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Ghulam Mohammad Qasir

As you were reading Shayari by Ghulam Mohammad Qasir

Similar Writers

our suggestion based on Ghulam Mohammad Qasir

Similar Moods

As you were reading Paani Shayari Shayari