koi chaara nahin dua ke siva | कोई चारा नहीं दुआ के सिवा

  - Hafeez Jalandhari

कोई चारा नहीं दुआ के सिवा
कोई सुनता नहीं ख़ुदा के सिवा

मुझ से क्या हो सका वफ़ा के सिवा
मुझ को मिलता भी क्या सज़ा के सिवा

बर-सर-ए-साहिल मुराद यहाँ
कोई उभरा है नाख़ुदा के सिवा

कोई भी तो दिखाओ मंज़िल पर
जिस को देखा हो रहनुमा के सिवा

दिल सभी कुछ ज़बान पर लाया
इक फ़क़त अर्ज़-ए-मुद्दआ के सिवा

कोई राज़ी न रह सका मुझ से
मेरे अल्लाह तिरी रज़ा के सिवा

बुत-कदे से चले हो काबे को
क्या मिलेगा तुम्हें ख़ुदा के सिवा

दोस्तों के ये मुख़्लिसाना तीर
कुछ नहीं मेरी ही ख़ता के सिवा

मेहर ओ मह से बुलंद हो कर भी
नज़र आया न कुछ ख़ला के सिवा

ऐ 'हफ़ीज़' आह आह पर आख़िर
क्या कहें दोस्त वाह वा के सिवा

  - Hafeez Jalandhari

Dosti Shayari

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