mujhe gham mile use chaah kar meri chaahaton ka zawaal hai | मुझे ग़म मिले उसे चाह कर मेरी चाहतों का ज़वाल है

  - Hameed Sarwar Bahraichi

मुझे ग़म मिले उसे चाह कर मेरी चाहतों का ज़वाल है
क्यूँ ख़फ़ा हुआ क्यूँ जुदा हुआ मेरा उस सेे बस ये सवाल है

उसे क्या मिले भला 'इश्क़ में जिसे खा गई हो दिवानगी
न तो रो सके न ही हॅंस सके न तो हिज्र है न विसाल है

कहीं ख़्वाब में था मिला मुझे उसी ख़्वाब में वो बिछड़ गया
कोई अप्सरा थी या महजबीं मेरी हसरतों का सवाल है

किसी एक दर पे रुका नहीं किसी एक का भी हुआ नहीं
न वो बे-वफ़ा न वो बा-वफ़ा यही उस हसीं का कमाल है

मेरी धड़कनों का वो अक्स था मेरी ज़िंदगी का सुतून था
वो बिछड़ गया मैं बिखर गया मेरी ज़िंदगी का ये हाल है

  - Hameed Sarwar Bahraichi

Aarzoo Shayari

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