इश्क़ में शामिल जात न कर
मुझ को हँस कर देख कभी
यूँ ग़म की तू बात न कर
दर्द आँखों में रहने दे
अश्कों की बरसात न कर
अब तो इनायत कर दे ख़ुदा
मुश्किल मेरी रात न कर
ख़ुश्क हैं सारे ज़ख़्म मिरे
फिर से हरे जज़्बात न कर
दुनिया फिर दिल तोड़ेगी
हर इक से तू बात न कर
भीड़ में अपना कोई न हो
सख़्त ऐसे हालात न कर
तोड़ के दिल अपना 'रेहान'
ख़ुद पे तू आघात न कर
— REHAN KHAN















