वतन को बाँटने वालो तुम्हें ये ज्ञान क्या होगा
जो बाँटे मुल्क में नफ़रत भला इंसान क्या होगा
हैं याँ मंदिर भी मस्जिद भी गुरुद्वारे मज़ारें भी
मगर हम ही नहीं होंगे तो हिन्दुस्तान क्या होगा
मैं अपने मुल्क की ख़ातिर यही पूछूँगा बस हर सू
जो दिल ही बँट गए तो मुल्क का सम्मान क्या होगा
जो बच्चों को विरासत में अदावत दे रहे हो तुम
बताओ उनका दुनिया में नफ़ा-नुक़सान क्या होगा
सियासत के लिए हर दिन जो नफ़रत बो रहे हो तुम
तुम्हारे बाद इस मिट्टी का फिर ईमान क्या होगा
जो अपने देश की ख़ातिर कटा पाए न ये गर्दन
वह ऐसा शख़्स फिर इस मुल्क का 'रेहान' क्या होगा
— REHAN KHAN















