अपने गले लगा ले मुझे यार की तरह

कब तक पड़ा रहूँगा यूँ बीमार की तरह

इल्ज़ाम जिस के हिस्से के बैठा हूँ सर लिए
वो देखता है मुझ को गुनहगार की तरह

आँखों से गुफ़्तुगू की तमन्ना तो है मगर
नज़रें हैं हू-ब-हू तेरी तलवार की तरह

इक रूह की तलब मुझे लाई थी मौत तक
इक जिस्म ने बचा लिया हर बार की तरह

— Harsh saxena

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