"ख़ुदा की आवाज़"
मेरे ख़्वाबों में जन्नत से
ख़ुदा की आवाज़ आती है
कि क्यूँ तू खुली
आँखों से सो जाता है
क्यूँ तू ख़्वाबों में भी जागता है
क्यूँ तेरी आँखें दर्द से लाल हैं
क्यूँ इन झलकते आँसुओं से
किसी की यादों की
महक आती है
मेरे ख़्वाबों में जन्नत से
ख़ुदा की आवाज़ आती है
— Shubham Burmen















