कभी इस मोड़ पे तुम सेे फ़क़त रुसवा हुआ हूँ मैं
तुम्हारे बाद रिश्तों में बहुत तन्हा हुआ हूँ मैं
सभी के साथ चलने की हिदायत दी बुज़ुर्गों ने
इन्हीं लोगों के संगत में ज़रा अच्छा हुआ हूँ मैं
कि मेरा दाम बढ़ने पर मुझे कोई न पाएगा
ख़रीदा जाय मुझको अब अभी सस्ता हुआ हूँ मैं
कि मेरे दिल के धड़कन में फ़क़त अब रेत बहती है
बिना पानी के बहता जो वही दरिया हुआ हूँ मैं
नहीं हालात थे अपने कभी भी इस-क़दर धीरज
गरीबों से शराफ़त सीखकर ख़र्चा हुआ हूँ मैं
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