gareebon ko ye masnad ki muhabbat maar daalegi | गरीबों को ये मसनद की मुहब्बत मार डालेगी

  - Gautam Raj 'Dheeraj'

गरीबों को ये मसनद की मुहब्बत मार डालेगी
गरीबी से जो बच जाए सियासत मार डालेगी

कभी मिलना किसी से तो बड़े ही रौब से मिलना
ये दुनिया दोगली सी है हक़ीक़त मार डालेगी

ज़माने भर के दस्तूरों को हम सर पे उठाए हैं
कभी जो छोड़ दे इनको रवायत मार डालेगी

ये सोचा था जुदा हो के बहुत ही ख़ुश रहेंगे हम
मगर लगता है अब उसकी ज़रूरत मार डालेगी

किसी से हार कर अब तुम यहाँ पे लौट आए हो
तुम्हें हम कहते रहते थे अक़ीदत मार डालेगी

  - Gautam Raj 'Dheeraj'

Haar Shayari

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