मचलती है जवानी रात में
बदलती है कहानी रात में
हसीनों से बता दो शहर की
मैं देता हूँ निशानी रात में
खिलाएँगे नया गुल मिल के हम
अगर बरसेगा पानी रात में
नहीं आया है राजा लौट कर
नहीं सोई है रानी रात में
सुनो 'सागर' मिरी तुम जान हो
ये कहती है दिवानी रात में
— SAAGAR SINGH RAJPUT















