मैं मेरा घर सजाना चाहता हूँ
तुम्हें दुल्हन बनाना चाहता हूँ
अँधेरा जान का दुश्मन बना है
मैं घर में चाँद लाना चाहता हूँ
ये तन्हाई मुझे अब काटती है
मैं तुम से दिल लगाना चाहता हूँ
मुझे तुम गीत सी लगती हो जानाँ
तुम्हें मैं गुनगुनाना चाहता हूँ
मैं इस दुनिया से उस दुनिया तलक जाँ
तुम्हारे साथ जाना चाहता हूँ
मैं 'सागर' था तुम्हारा हूँ तुम्हारा
यही वादा निभाना चाहता हूँ
— SAAGAR SINGH RAJPUT















