KHvaab aankhoñ se zabaan se har kahaanii le gaya | ख़्वाब आँखों से ज़बाँ से हर कहानी ले गया

  - Iffat Zarrin

ख़्वाब आँखों से ज़बाँ से हर कहानी ले गया
मुख़्तसर ये है वो मेरी ज़िंदगानी ले गया

फूल से मौसम की बरसातें हवाओं की महक
अब के मौसम की वो सब शा
में सुहानी ले गया

दे गया मुझ को सराबों का सुकूत-ए-मुस्तक़िल
मेरे अश्कों से वो दरिया की रवानी ले गया

ख़ाक अब उड़ने लगी मैदान सहरा हो गए
रेत का तूफ़ान दरियाओं से पानी ले गया

कौन पहचानेगा 'ज़र्रीं' मुझ को इतनी भीड़ में
मेरे चेहरे से वो अपनी हर निशानी ले गया

  - Iffat Zarrin

Paani Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Iffat Zarrin

As you were reading Shayari by Iffat Zarrin

Similar Writers

our suggestion based on Iffat Zarrin

Similar Moods

As you were reading Paani Shayari Shayari