pareshaan log saare hain ke kyun aadat mein shaamil hai | परेशांँ लोग सारे हैं के क्यूँ आदत में शामिल है

  - S M Afzal Imam

परेशांँ लोग सारे हैं के क्यूँ आदत में शामिल है
तेरा अफ़ज़ल जहांँ जाना वहीं मशहूर हो जाना

  - S M Afzal Imam

Aadmi Shayari

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    चाय पीते हुए तेरी आँखें पढ़ें
    और फिर तेरी आँखों पे चर्चा करें
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    क्या नहींं हम करें और क्या क्या करें

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    तुमको देखा करें और देखा करें

    चाय पीते हुए तेरी आँखें पढ़ें
    और फिर तेरी आँखों पे चर्चा करें

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    पर ज़रूरी नहीं हम भी अच्छा करें

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