गिरा पड़ा के न यूँँ तार तार कर मुझ को
मिरे हवाले ही कर दे पुकार कर मुझ को
मिरी तलाश में कौन आएगा मिरे अंदर
यहीं पे फेंक दिया जाए मार कर मुझ को
मैं जितना क़ीमती हूँ उतना बद-नसीब भी हूँ
वो सो रहा है गले से उतार कर मुझ को
— Ismail Raaz
मिरे हवाले ही कर दे पुकार कर मुझ को
मिरी तलाश में कौन आएगा मिरे अंदर
यहीं पे फेंक दिया जाए मार कर मुझ को
मैं जितना क़ीमती हूँ उतना बद-नसीब भी हूँ
वो सो रहा है गले से उतार कर मुझ को
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