दीवार दरिया या कहीं सहरा ना होमुमकिन नहीं के प्यार पे पहरा ना होजब दूर थे ये दर्द-ए-दिल पैदा हुआनजदीकियों से फिर ये क्यूँ गहरा ना हो— Taufique Habib