तर हुआ दीदा-ए-बीना तो ग़ज़ल बोलेगी

  - Jaani Lakhnavi

तर हुआ दीदा-ए-बीना तो ग़ज़ल बोलेगी
पैकर-ए-दर्द जो सिमटा तो ग़ज़ल बोलेगी

इतनी 'उजलत में नहीं चलता सुख़न का जादू
तुम कभी ग़ौर से सुनना तो ग़ज़ल बोलेगी

एक इक शे'र खिलेगा तो खिलेंगी ग़ज़लें
फ़ल्सफ़ा शे'र में होगा तो ग़ज़ल बोलेगी

मेरे लहजे से परेशानी है तुझ को सुन ले
मैं जो ख़ामोश रहूँगा तो ग़ज़ल बोलेगी

सोच पर क़ब्ज़ा है शोहरत का तो बोले कैसे
रंग ख़ल्वत का चढ़ेगा तो ग़ज़ल बोलेगी

  - Jaani Lakhnavi

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