"नाकारा"कौन आया हैकोई नहीं आया है पागलतेज़ हवा के झोंके से दरवाज़ा खुला हैअच्छा यूँ हैबेकारी में ज़ात के ज़ख़्मों की सोज़िश को और बढ़ानेतेज़-रवी की राह-गुज़र सेमेहनत-कोश और काम के दिन कीधूल आई है धूप आई हैजाने ये किस ध्यान में था मैंआता तो अच्छा कौन आताकिस को आना था कौन आता— Jaun Elia