jama ham ne kiya hai gham dil mein | जमा हम ने किया है ग़म दिल में

  - Jaun Elia

जमा हम ने किया है ग़म दिल में
इस का अब सूद खाए जाएँगे

  - Jaun Elia

Dard Shayari

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    लोग हमसे सीखते हैं ग़म छुपाने का हुनर
    आओ तुमको भी सिखा दें मुस्कुराने का हुनर

    क्या ग़ज़ब है तजरबे की भेंट तुम ही चढ़ गए
    तुम से ही सीखा था हमने दिल दुखाने का हुनर
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    Kashif Sayyed
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    जौन तुम्हे ये दौर मुबारक, दूर ग़म-ए-अय्याम से हो
    एक पागल लड़की को भुला कर अब तो बड़े आराम से हो
    Jaun Elia
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    भला तुम कैसे जानोगे मिला है दर्द जो गहरा
    वो जैसे नोचता है बाल अपने नोच कर देखो
    Kushal "PARINDA"
    दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
    लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
    Faiz Ahmad Faiz
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    न आया ग़म भी मोहब्बत में साज़गार मुझे
    वो ख़ुद तड़प गए देखा जो बे-क़रार मुझे
    Asad Bhopali
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    वो रातें चाँद के साथ गईं वो बातें चाँद के साथ गईं
    अब सुख के सपने क्या देखें जब दुख का सूरज सर पर हो
    Ibn E Insha
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    ये ग़म हमको पत्थर कर देगा इक दिन
    कोई आ कर हमें रुलाओ पहले तो
    Siddharth Saaz
    उनके दुखों को शे'र में कहना तो था मगर
    लड़के समझ न पाएँ कभी लड़कियों का दुख
    Ankit Maurya
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    कहीं से दुख तो कहीं से घुटन उठा लाए
    कहाँ-कहाँ से न दीवानापन उठा लाए

    अजीब ख़्वाब था देखा के दर-ब-दर हो कर
    हम अपने मुल्क़ से अपना वतन उठा लाए
    Read Full
    Farhat Abbas Shah
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    इस क़दर जज़्ब हो गए दोनों
    दर्द खेंचूँ तो दिल निकल आए
    Abbas Qamar
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    बाग़बाँ हम तो इस ख़याल के हैं
    देख लो फूल फूल तोड़ो मत
    Jaun Elia
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    ये ग़म क्या दिल की 'आदत है नहीं तो
    किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो

    है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को
    भुला देने की नीयत है नहीं तो

    किसी के बिन किसी की याद के बिन
    जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो

    किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ
    तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो

    तेरे इस हाल पर है सब को हैरत
    तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो

    हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी
    तुझे इस पर नदामत है नहीं तो

    हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या
    यही सारी हिकायत है नहीं तो

    अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझको
    अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो

    तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम
    तो इसकी वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो

    सबब जो इस जुदाई का बना है
    वो मुझसे ख़ूबसूरत है नहीं तो
    Read Full
    Jaun Elia
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    ये ख़राबातियान-ए-ख़िरद-बाख़्ता
    सुब्ह होते ही सब काम पर जाएँगे
    Jaun Elia
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    अपना रिश्ता ज़मीं से ही रक्खो
    कुछ नहीं आसमान में रक्खा
    Jaun Elia
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    जो गुज़ारी न जा सकी हम से
    हम ने वो ज़िन्दगी गुज़ारी है
    Jaun Elia
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