
मुझ को ये जादू आ जाए
तुझ को सोचूँ तू आ जाए
कूचे में फिरता हूँ तेरे
शायद बाहर तू आ जाए
ऐसे ऐसे शे'र कहूँ मैं
लफ़्ज़ों में ख़ुशबू आ जाए
जिस शय को मैं हाथ लगाऊँ
उस में वो ख़ुश-रू आ जाए
काश कभी बीमार पड़ूँ मैं
मुझ से मिलने तू आ जाए
— Uday Jhanjhani
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