उस आँखों में नींद नहीं जो ख़्वाबों का सौदाई है
कुछ सपनों को सच करने में जिस ने उम्र गँवाई है
यार भरोसा किस पर कर लूँ सब ने दिल को तोड़ा है
जिस को मैं ने यार कहा फिर वो निकला हरजाई है
वो सपने तो टूट गए जो साथ तुम्हारे देखे थे
तुम ने सारे वादे तोड़े मैं ने प्रीत निभाई है
हम ने ख़ुद को मार दिया बस नाम की साँसें चलती हैं
जिस दिन ये मालूम हुआ था तेरी गोद भराई है
— Jitendra "jeet"















