'ishq men koi aisa bhi anjaam ho | 'इश्क़ में कोई ऐसा भी अंजाम हो

  - 'June' Sahab Barelvi

'इश्क़ में कोई ऐसा भी अंजाम हो
संग ही सुब्ह और संग ही शाम हो

बद-दुआ उसकी शायद लगी है मुझे
अब दुआ दे कोई मुझको आराम हो

गुफ़्तगू ख़ूब लिख लिख के करते हैं पर
कॉल कर लें अगर उनको इल्हाम हो

उसको दरकार है आजकल प्यार की
या ख़ुदा उसकी नफ़रत मिरे नाम हो

बात लड़कों की करनी है कर लो मगर
इस फ़ज़ीहत में शाइर न बदनाम हो

काश आ जाए वो दौर फिर लौटकर
दोस्तों संग बस जाम पे जाम हो

कोई ऐसी जगह जू'न मिलती नहीं
रिश्वतों के बिना अब जहाँ काम हो

  - 'June' Sahab Barelvi

Khuda Shayari

Our suggestion based on your choice

More by 'June' Sahab Barelvi

As you were reading Shayari by 'June' Sahab Barelvi

Similar Writers

our suggestion based on 'June' Sahab Barelvi

Similar Moods

As you were reading Khuda Shayari Shayari