अब नहीं तुझ से मुहब्बत अब दिखावा क्यूँँ करूँँ
लोग करते हैं तमाशा मैं तमाशा क्यूँँ करूँँ
मैं ही क्यूँँ हर बार बोलूँ प्यार तो तुझ को भी है
तुझ को मिलना है तो आजा मैं तक़ाज़ा क्यूँँ करूँँ
देखना ही प्यार है तो ये सितम मुझ पे ही क्यूँँ
तू भी छुप कर देख मुझ को मैं ही देखा क्यूँँ करूँँ
देखता हूँ आज-कल लोगों को मैं रोते हुए
मुस्तक़िल दिल में तिरे फिर मैं ठिकाना क्यूँँ करूँँ
कहती है वो 'जौन' जैसे दिखते हो बालों से तुम
क्यूँँ न बिखरे रहने दूँ फिर इन को बाँधा क्यूँँ करूँँ
दिल में जो लड़की नहीं है उस से शादी है मिरी
फिर तो सौदा वस्ल का है फिर ये सौदा क्यूँँ करूँँ
वो मिरे दिल में बसी है और तू बस रू-ब-रू
उस से रिश्ता तोड़ कर मैं तुझ से रिश्ता क्यूँँ करूँँ
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