bolkar ज़ाया' har baat karte rahe | बोलकर ज़ाया' हर बात करते रहे

  - 'June' Sahab Barelvi

बोलकर ज़ाया' हर बात करते रहे
तेरी ये मेरी ये ज़ात करते रहे

बातों बातों में इक शे'र ऐसा कहा
लोग क्या बात क्या बात करते रहे

बे-वजह इक हसीं आके पल्ले पड़ी
जाने क्या क्या ख़ुराफ़ात करते रहे

है तराशा बदन चेहरा भी नूर सा
रात भर बस सवालात करते रहे

बाँहों में बाँहें डाले हैं दोनों मगर
चाँद तारों की हम बात करते रहे
'इश्क़ करके फ़ना हम कुछ ऐसे हुए
ठीक दिन रात हालात करते रहे

जू'न से ही तो बस प्यार उनको न था
बाक़ियों पर भी बरसात करते रहे

  - 'June' Sahab Barelvi

Ulfat Shayari

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