mire kamre ke bade taq men ik aaina | मेरे कमरे के बड़े ताक़ में इक आईना

  - Kaif Moradaabadi
मेरेकमरेकेबड़ेताक़मेंइकआईना
सूरतेंसबकोदिखानेकेलिएरक्खाहै
सामनेआइनेकेबैठकेरोज़एकचिड़ा
जानेक्यूँँअक्ससेअपनेहीलड़ाकरताहै
कभीपंजोंसेकभीचोंचसेहमलेकरके
येसमझताहैउसेजीतयक़ीनीहोगी
इसहिमाक़तसेअगरबाज़नहींआएगा
चोंचक्याउसकीतोरगरगकभीज़ख़्मीहोगी
जबकोईकामहोगाउसेलड़नेकेसिवा
साँसभीलेसकेगाकभीबे-ख़ौफ़-ओ-हिरास
फिरकिसीदिनयेतमाशाभीनज़रआएगा
नन्हीसीलाशपड़ीहोगीउसआइनेकेपास
सोचताहूँकिमिरेमुल्ककेलाखोंबच्चे
रोज़आपसमेंइसीतरहलड़ाकरतेहैं
फ़ाएदाइससेकिसीकोभीनहींहोताहै
कुछकुछअपनाहीनुक़सानकियाकरतेहैं
यहीआदतजोबनालीतोवोदिनभीहैक़रीब
चैनसेरहसकेंगेयेलड़ाईकेबग़ैर
कोईभीपाससेगुज़रातोख़ुशीकाक्याज़िक्र
कुछभीतोकहसकेंगेयेलड़ाईकेबग़ैर
बे-सबबलड़नेकेजज़्बेकोजोरोकागया
लोगआक़िलहोंकिनादानलड़ेजाएँगे
अपनीफ़ितरतहीबनालेंगेजोबाहमलड़ना
जानवरहोंकिहोंइंसानलड़ेजाएँगे
वोमुख़ालिफ़सहीअपनाकोईअक्ससही
मिलहीजाएगाउन्हेंकोईझगड़नेकेलिए
आइनेसामनेरखकरयहीसरकशबच्चे
बैठजाएँगेहरइकसुब्हकोलड़नेकेलिए
सबरहेजाएँगेआपसमेंअगरमिल-जुलकर
हरजगहमुल्कमेंगुलज़ारनज़रआएँगे
औरअगरबुग़्ज़-ओ-अदावतकायहीजोशरहा
जा-ब-जालाशोंकेअम्बारनज़रआएँगे
  - Kaif Moradaabadi
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Aadat Shayari

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