मिरी मस्ती के अफ़्साने रहेंगे

जहाँ गर्दिश में पैमाने रहेंगे

निकाले जाएँगे अहल-ए-मोहब्बत
अब इस महफ़िल में बेगाने रहेंगे

यही अंदाज़-ए-मय-नोशी रहेगा
तो ये शीशे न पैमाने रहेंगे

रहेगा सिलसिला दार-ओ-रसन का
जहाँ दो चार दीवाने रहेंगे

जिन्हें गुलशन में ठुकराया गया है
उन्हीं फूलों के अफ़्साने रहेंगे

ख़िरद ज़ंजीर पहनाती रहेगी
जो दीवाने हैं दीवाने रहेंगे

— Kaleem Aajiz

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Qaid Shayari

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