कब किसी को ख़ला है मयख़ाना
जान-ओ-दिल बन गया है मयख़ाना
तेरे बीमार का पता क्या है
उस ने हँस कर कहा है मयख़ाना
ये न दैर-ओ-हरम न का'बा है
क्या बताऊँ कि क्या है मयख़ाना
दीन-ओ-मज़हब न कोई पूछे वहाँ
क़ाफ़िरों का पता है मयख़ाना
आप तहज़ीब से यहाँ बैठें
घर नहीं आप का है मयख़ाना
चल पड़े यार कुछ पुराने मगर
क्या किसीको पता है मयख़ाना
कोई तन्हा नहीं यहाँ 'माही'
सब को इक क़ाफ़िला है मयख़ाना
— Karal 'Maahi'















