अपना रोना आप न रो
घर-घर के दालान भिगो
वो क्यूँ मुड़ कर देखेगा
उस के दिल में कुछ तो हो
तन्हाई का एक इलाज
ख़ुद के दो हिस्से कर लो
हम लोगों के नाम नहीं
तुम तो अपने नाम लिखो
आठ बजे का वा'दा था
बजने को हैं रात के दो
ओ सहरा के दीवानों
डूब के दरिया पार करो
आज तुम्हारी शादी है
आज तो उस का नाम न लो
— Karan Sahar















