बस एक बार वो कह दे कि तेरे प्यार में हूँ
कभी तो आए मेरा दिन भी इंतिज़ार में हूँ
अभी न पूछिए नुक़सान फ़ाएदा मुझ को
मैं एक-तरफ़ा मोहब्बत के कारोबार में हूँ
वो इंतिख़ाब हज़ारों में बस मेरा कर ले
ये ख़्वाब देखने वालों की इक क़तार में हूँ
हवा हो तेज़ तो शाख़ें भी टूट जाती हैं
चराग़ जलता रहेगा मैं किस ख़ुमार में हूँ
हाँ बन गए सभी पक्के मकान के मालिक
बस एक मैं हूँ जो अब भी किराएदार में हूँ
— Kartik Bhalerao















