देता रहा सहारा अँधेरे को रात भरजुगनू क़फ़स में क़ैद है इतनी सी बात परक़ुदरत ने अपनी जेब से सब कुछ दिया तुझेमारा है किस ने हक़ तेरा ख़ुद ही तलाश कर— Kartik Bhalerao