जाऊँ जिस सम्त इजाज़त है मुझे
दश्त में कितनी सुहूलत है मुझे
इन मकीनों का सुलूक अपनी जगह
दर-ओ-दीवार पे हैरत है मुझे
तुम भी मसरूफ़ नज़र आते हो
मैं भी चलता हूँ कि 'उजलत है मुझे
मैं हवा में जो उड़ा फिरता हूँ
ग़ालिबन ख़ाक से निस्बत है मुझे
याद रखता हूँ जहाँ लोगों को
भूल जाने की भी आदत है मुझे
काम कुछ आन पड़ा है ऐसा
वर्ना क्या दिल की ज़रूरत है मुझे
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