बह गई याद उस की पानी में
अब बचा क्या है ज़िंदगानी में
आप ने ग़ौर से पढ़ा ही नहीं
हम भी मौजूद थे कहानी में
काश तुम से मिलें किसी दिन यूँ
जैसे मिलता है पानी पानी में
— Kashif Sayyed
अब बचा क्या है ज़िंदगानी में
आप ने ग़ौर से पढ़ा ही नहीं
हम भी मौजूद थे कहानी में
काश तुम से मिलें किसी दिन यूँ
जैसे मिलता है पानी पानी में
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