pyaar men padkar jaan bachaana mushkil tha | प्यार में पड़कर जान बचाना मुश्किल था

  - Shayra kirti

प्यार में पड़कर जान बचाना मुश्किल था
और फिर मैं तो बचपन से ही बुज़दिल था

घबराकर मरने की धमकी देता था
वो भी उसको जो के मेरा क़ातिल था

ग़ैर की ख़ातिर था
में दिल अब रोता है
मेरे साथ में शख़्स वो कितना संगदिल था

इन शानों पर सहराओं के आँसू हैं
हर इक को ये सूखा दरिया हासिल था

हम शुरुआत से कीर्ति इस से वाक़िफ़ थे
ना मैं उसके ना वो मेरे क़ाबिल था

  - Shayra kirti

Love Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Shayra kirti

As you were reading Shayari by Shayra kirti

Similar Writers

our suggestion based on Shayra kirti

Similar Moods

As you were reading Love Shayari Shayari