muskuraa rahe hain aap dost aap kaun hain | मुस्कुरा रहे हैं आप दोस्त आप कौन हैं

  - Shayra kirti

मुस्कुरा रहे हैं आप दोस्त आप कौन हैं
चाह क्या रहे हैं आप दोस्त आप कौन हैं

हम हज़ीं हैं मुब्तिला इबादत-ए-फ़िराक़ में
आज़मा रहें हैं आप दोस्त आप कौन हैं

हम दुकान बंद कर चुके हैं 'इश्क़ की जनाब
खटखटा रहें हैं आप दोस्त आप कौन हैं

ज़ख़्म वो जो जिस्म हो चुके हैं रिसते रिसते अब
देख पा रहे हैं आप दोस्त आप कौन हैं

सात साल जान-माल लेके पूछते हैं वो
जान खा रहे हैं आप दोस्त आप कौन हैं

बाग में मेरे मेरी ही नाक के तले ग़ज़ब
गुल खिला रहे हैं आप दोस्त आप कौन हैं

बज़्म में वफ़ा जफ़ा दग़ा हया की बात है
तिलमिला रहे हैं आप दोस्त आप कौन हैं

बार-बार बात-बात में उसी अज़ीज़ का
नाम ला रहे हैं आप दोस्त आप कौन हैं

लोग-बाग पूछते हैं पढ़ के तुझको कीर्ति
जी जला रहें हैं आप दोस्त आप कौन हैं

  - Shayra kirti

Haya Shayari

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