saste aashiqzaado ki bhi khol nahin | सस्ते आशिक़ज़ादो की भी खोल नहीं

  - Shayra kirti

सस्ते आशिक़ज़ादो की भी खोल नहीं
अमलों से मिलते ख़ुद इनके बोल नहीं

आप कमाई जाए तब माशूक़ा है
हाथ लगी हूरों का कोई मोल नहीं

सब बिकता है हीरे मोती रिश्ते प्यार
महँगे हो सकते हैं पर अनमोल नहीं

प्यार अकेली शय है मारी क़िस्मत की
शिद्दत का इस फ़न में कोई रोल नहीं

आप के सपने फिर मुझ सेे टकराने के
गोल है दुनिया पर इतनी भी गोल नहीं

  - Shayra kirti

Rishta Shayari

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