aisa thodii tha ki mujhko gham na tha | ऐसा थोड़ी था कि मुझको ग़म न था

  - Kinshu Sinha

ऐसा थोड़ी था कि मुझको ग़म न था
ग़म था पर उस ग़म का तू मरहम न था
इश्क़ था तो क्यूँ तेरी हर बात में
सिर्फ़ मैं ही मैं था कोई हम न था

ठीक है मसरूफ़ था तू और कहीं
पर मैं भी दीवाना तेरा कम न था

तेरा दिल रखना था सो जाने दिया
ये न समझो रोकने का दम न था

क्यूँ न करता इश्क़ में समझौते मैं
मैं किसी दिल के लिए परचम न था

मैंने तुझ
में झाँका था हिजरत के बाद
तेरे दिल में दर्द का मौसम न था

अब मैं समझा क्यूँ दग़ा मिलता रहा
मुझ
में ही ख़म थे किसी में ख़म न था

  - Kinshu Sinha

Dil Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Kinshu Sinha

As you were reading Shayari by Kinshu Sinha

Similar Writers

our suggestion based on Kinshu Sinha

Similar Moods

As you were reading Dil Shayari Shayari