कैसे विदा करूँँगा उस बेटी को
जिस को गोद में खिलाया था
कैसे विदा करूँगा उस बेटी को
जिस को आँखों पे बिठाया था
पिता के कलेजे का टुकड़ा
माँ की दिल की धड़कन
पूरे घर में चहकती फिरती थी जो
पूरे घर को महकाती फिरती थी जो
सबके चेहरे का नूर थी जो
कैसे विदा करूँगा उस बेटी को
जिस के एक आँसू से चैन खो जाता था
जिस की एक हसीं से दुख दर्द छू हो जाता था
कैसे विदा करूँगा उस बेटी को!
— Kumar Rishi















