KUNAL
KUNAL
Ghazal

दो लोगों में प्यार हुआ था हुस्न और उदासी में

ऐसा पहली बार हुआ था हुस्न और उदासी में

ख़त्म जहाँ तू शुरूअ वाँ मैं ऐसे लड़ते थे
पहले यूँ इसरार हुआ था हुस्न और उदासी में

आधा आधा बाँट लिया था पूरी दुनिया को
मिल कर ये इकरार हुआ था हुस्न और उदासी में

राह वही थी लेकिन सारी ऊबड़ खाबड़ थी
रस्ता कब हमवार हुआ था हुस्न और उदासी में

एक में पल कर बड़ा हुआ था एक से चाहत थी
दिल उस का दो चार हुआ था हुस्न और उदासी में

— KUNAL

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